क्या भारत के राजनीतिज्ञों के लिए अभी भी देश के बच्चे प्राथमिकता नहीं हैं। - कैलाश सत्यार्थी

Jan 11, 2019, 4:06 pm, by: Editor_@moGossipApp

देश की राजधानी दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री स्मृति व्याख्यान "सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भारत" कार्यक्रम का आयोजन 10 जनवरी, 2019.. किया गया। इस आयोजन में नोबेल शान्ति पुरुष्कार विजेता श्री कैलाश सत्यार्थी, लाल बहादुर शास्त्री के बेटे श्री सुनील शास्त्री, श्री अनिल शास्त्री मौजूद थे। इस मौके पर श्री नोबेल शान्ति पुरुष्कार विजेता श्री कैलाश सत्यार्थी जी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, भारत का राजनीतिक वर्ग एक बार फिर उन लाखों बच्चियों और बच्‍चों  को सुरक्षित बनाने में विफल हुआ है, जिनको जानवरों से भी कम कीमत पर खरीदा और बेचा जाता है। ट्रैफिकिंग (दुर्व्‍यापार) के पीड़ित ये बच्‍चे इस बार राज्यसभा से एंटी ट्रैफिकिंग बिल के पारित होने की आस लगाए बैठे थे, लेकिन उनकी उम्‍मीदों पर पानी फिर गया।

 राज्‍यसभा से ट्रैफिकिंग बिल का पास नहीं होना, इस बात को प्रमाणित करता है कि बच्‍चे अभी भी राजनीतिक प्राथमिकता में शामिल नहीं हैं। महज नारेबाजी, बयानबाजी और जुमलेबाजी कभी भी हमको न्‍याय की डगर तक नहीं पहुंचा सकती और न ही यह सामाजिक बदलाव में सहायक हो सकती है। पिछले कुछ दिनों में हर किसी ने यह देख लिया है कि किस तरह से संसदरूपी लोकतंत्र के मंदिर का उपयोग राजनीतिक और चुनावी लाभ प्राप्‍त करने के लिए किया जा रहा है। उसको देखते हुए यही कहा जा सकता है कि हमारे चुने हुए प्रतिनिधि उन बड़े सरोकारों के प्रति कतई चिंतित नहीं हैं जो मासूम और बे-दाग बचपन को लील रहा है।

इस मौके पर लाल बहादुर शास्त्री के सुपुत्र श्री अनिल शास्त्री ने कैलाश सत्यार्थी जी को धन्यवाद देते हुए कहा कि सत्यार्थी जी का इस कार्यक्रम में होना हमारे लिए गर्व की बात है।

इस मौके पर श्री मुदित शास्त्री ने लोगों का धन्यवाद दिया। मुदित शास्त्री ने सत्यार्थी जी के द्वारा बच्चों के लिए चलाए गए अभियान की तारीफ करते हुए कहा कि आने वाले समय में देश का हर बच्चा हक से जी सकेगा।

इस मौके पर श्री नोबेल शान्ति पुरुष्कार विजेता ने सुनील शास्त्री और अनिल शास्त्री का धन्यवाद किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि भारत के दूसरे प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्‍त्री मेरे प्रेरणा स्रोतों में एक रहे हैं। मैंने आजतक उनके कद का कोई दूसरा नैतिक नेता नहीं देखा। सादगी, लोकाचार और राजनीतिक मूल्‍यों के वे प्रतिमूर्ति थे। उनके जैसा होना आज दुर्लभ है।