धर्म राजनीति समाज और पॉलिटिक्स ...

Jun 22, 2018, 2:09 pm, by: Tarun Jain _@onlyubi

पिछले कुछ दिनों से देश की राजनीति में 2 घटनाओं की वजह से उबाल आ रहा है। यदि आप कश्मीर में बीजेपी की बेवफाई और दिल्ली में केजरी एंड पार्टी के धरने को वे दो घटनाएं मान रहे है तो हां आप अपनी जगह सही है। लेकिन इस लेख में मैं बात कर रहा हूँ ऐसी दो घटनाओं की जिन्हें वेवजह धर्म से जोड़ दिया गया।

पहली घटना टेलीकॉम सेक्टर की बड़ी कंपनी एयरटेल से जुड़ी हुई है। जिसमें एक यूजर द्वारा ट्विटर पर एयरटेल के खिलाफ शिकायत की गई। आरोप है कि कंपनी ने शिकायत के निपटारे के लिए पहले मुस्लिम कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव को ड्यूटी दी। लेकिन ग्राहक की मांग पर फिर हिन्दू कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव को ड्यूटी दे दी। इस पूरे घटनाक्रम को नेताओं के साथ साथ मीडिया ने भी हाथों-हाथ लिया। ऐसे में चर्चाओं का बाजार पूरी तरह गर्म रहा।

दूसरी घटना लखनऊ की है जहां पासपोर्ट आफिस पर धर्म के नाम पर कार्य करने का आरोप लगा। आरोप था कि पासपोर्ट अधिकारियों ने हिन्दू महिला द्वारा मुस्लिम पुरुष से विवाह करने की वजह से उसका पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया रोक दी। इस घटना को लेकर भी खूब राजनीति की गई। दूसरी खबरों की तरह इस मामले को भी सोशल मीडिया पर खूब भुनाया गया। लेकिन सत्यता को लेकर सबने अलग अलग दावे किए।

खैर सच क्या है ये अपना विषय नहीं है। अपना विषय है कि आखिर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्यों नही कदम उठाया जाता। जानकारों की माने तो ऐसी घटनाओं को जान बूझकर वायरल किया जाता है। ताकि अधिक से अधिक लोगों को एक विशेष धर्म को मानने वाले लोगों के खिलाफ नफरत का माहौल तैयार किया जा सके। फिर चुनाव के समय इसी नफरत भरे माहौल को अपने पक्ष में किया जा सके।

सभी जानते है कि आम चुनावों के होने में एक वर्ष से भी कम समय बचा है। इसलिए राजनीतिक पार्टियों द्वारा अधिक से अधिक लोगों को अपने पक्ष में करने के लिए इसी नफरत भरे माहौल को बढ़ाने की कोशिश तेज़ हो रही है। अब ये सिर्फ आरोप है या सच्चाई, इसका फैसला तो आने वाला समय ही करेगा।