कर्नाटक चुनाव: राजनीति में रुचि न होने के बाद भी सभी की गॉसिप में शामिल

May 17, 2018, 6:15 pm, by: Tarun Jain @onlyubi

कर्नाटक का चुनाव और उसका परिणाम आ भी गया और खत्म भी हो गया। राजनीति में रुचि न होने के बाद भी देश के प्रत्येक नागरिक की जुबान पर सिर्फ यही चुनाव चल रहा था। भले ही प्रधान सेवक और उनके चाणक्य की बदौलत बीजेपी की ओर से येदि ने शपथ ली और कांग्रेस सिर्फ कोर्ट की लड़ाई तक सीमित रह गई। लेकिन असली जीत तो उस जनता की हुई है, जो वोट डालने के लिए घर से बाहर निकली।
हर चुनाव की तरह यह चुनाव अपने पीछे काफी चुटकुले छोड़ गया। इसमें कोई दो राय नहीं कि इन चुटकुलों का मुख्य केंद्र स्वयं घोषित युवराज ही होंगे। जिस तरह से देश के प्रधानसेवक के पक्ष में और युवराज के खिलाफ सोशल मीडिया पर हंसी के फुहार चल रही है, उससे युवराज जी और उनके प्यादों का बी.पी. बढऩा तो तय है।


जिसका उपचार करने के लिए चिंतन बैठकों के नाम पर चाय के प्याले छलकाए जाएंगे। जहां पर काम की बात कम, एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के दौर जरूर चलेंगे।
उधर बीजेपी के खेमे में भी चर्चाएं कम नहीं होंगी। हर कोई जीत का श्रेय लेने के लिए अपना नाम आगे कर रहा होगा। इन चुनावों में असली मेहनत किसकी थी, इसको लेकर माथापच्ची होगी। वहीं कर्नाटक के लोगों से ज्यादा पूरे देश में गॉसिप चल रही थी कि वहां पर सरकार बीजेपी ही बनाएंगी। अब जब येदी शपथ ले चुके है तो लोगों में यह उत्सुकता है कि वे बहुमत पाकर अपनी और अपनी पार्टी की नैया को पार कैसे लगाएंगे। वही दूसरी ओर कांग्रेस और जे.डी.एस. को मीटिंग-मीटिंग खेलने दो।