राजनीति और हमारा जीवन कुछ गॉसिप

Feb 14, 2018, 4:46 pm, by: Tarun Jain

राजनीति। यह सिर्फ एक नीति नहीं बल्कि आम जनता के सुबह का नाश्ता, दोपहर का लंच और शाम का डिनर भी है। विद्यार्थी इसे क्लास में इसलिए पढ़ते है क्योंकि उन्हे लगता है कि यह अंग्रेजी या मैथ्स से आसान है। वहीं हमारे नेता इसलिए सीखते है ताकि सत्ता की कुर्सी मिल सकें और वे देश का विकास कर सकें। वो बात अलग है कि विकास हो नहीं पा पाता। वहीं दूसरी ओर ऑफिस में काम करने वाले इसलिए सीखते है कि ताकि साथी कर्मचारी को नीचा दिखाया जा सकें  या ऑफिस से निकलवाया जा सकें। गृहणियां इसलिए इसमें रूचि लेती है क्योंकि यह उनका फेवरेट टाइम पास बन जाता है। जिस तरह से मिसेेज को सिर्फ गॉसिप ही नहीं बल्कि अपनी-अपनी सास व बहुओं की बुराई करने में मजा आता है उसी तरह से अपनी देवरानी-जेठानी को मात देने के लिए वे राजनीति सीखने की कोशिश करती है।

राजनीति शायद एक ऐसा टॉपिक है जो मीडिया में सबसे ज्यादा दिखाया जाता है। जिस तरह से खेलों में क्रिकेट का एकछत्र राज है उसी तरह से देश की समस्याओं से बढ़कर राजनीति सबसे ऊपर है। खबरिया चैनलों पर अलग-अलग पार्टियों के नेताओं की डिस्कशन के नाम पर नकली लड़ाई भले ही टीआरपी दे या न दे लेकिन आज जनता इसको लेकर पूरे मजे लेती है। अखबारों की सुर्खियों में यही राजनीति पहले पन्ने पर स्थान पाती है।

किसी देशवासी कुछ अच्छा काम किया वह एक नेता के इस्तीफे की खबर के नीचे दब कर रह जाती है। सुना है आजकल तो राजनीति के गुर सिखानें के लिए संस्थान भी खुलने लगे है। जहां पर राजनीति के फंडे सिखाने के साथ-साथ रणनीति बनानी भी

सिखाई जा रही है। फीस भी नेता जी के कद के अनुसार तय होती है। सेंट्रल राजनीति के लिए अधिक फीस, प्रादेशिक राजनीति के लिए कम फीस और तो लोकल सरपंच बनने तक का प्रशिक्षण मिलने लगा है। अब यह पता नहीं की इन प्रशिक्षणों के बाद भी कोई राजनीति को कोई लाभ होगा या नहीं।